सर्वशक्तिमान

अलेक्सेइ अर्खिपोव

परिचय अंश

यह पहले अध्याय के आरंभ का हिंदी अनुवाद है। पूरी रचना रूसी में पढ़ने का लिंक नीचे दिया गया है।

अध्याय 1 — आरंभिक अंश

केट टैक्सी की खिड़की से शहर को देख रही थी। बारिश शहर की साफ़ रूपरेखाओं को ढककर उसे किसी अँधेरी, बेआकार चीज़ में बदल रही थी। सिर्फ़ रोशनी याद दिलाती थी कि यहाँ कोई बनावट भी है। सड़क की बत्तियों, फ़्लडलाइटों और खिड़कियों की चमक शहर को पूरी तरह घुल जाने से रोक रही थी।

उसे ऐसा मौसम पसंद नहीं था। वह शहर को एक निराकार चीज़ में बदल देता था — अँधेरे, सुनसान विस्तार में धुँधली चमक और छायाओं का बहुरूपदर्शक। उसके ख़याल में शहर को अनुशासित, स्पष्ट और समझ में आने वाला होना चाहिए था, और सबसे बढ़कर जीवंत। कई हफ़्तों से जारी बारिश इन सभी निशानियों को मिटा रही थी।

वह कोट में लिपटी बैठी थी, कॉलर से चेहरा कुछ ढका हुआ। सफ़र शुरू होने के बाद से वह बिल्कुल स्थिर थी और अँधेरी टैक्सी में मुश्किल से दिखाई दे रही थी। ड्राइवर बीच-बीच में मुड़कर देखता कि वह सचमुच किसी को ले भी जा रहा है या नहीं।

केट गहरी सोच में डूबी थी। लगता था, कोई अनावश्यक हरकत उसके विचारों की नाज़ुक बनावट को बिखेर देगी। उसका मन बेचैनी से पहेली सुलझाने की कोशिश कर रहा था, मगर हर बार ज़रूरी टुकड़ों की कमी सामने आ जाती। जिस काम पर वह विचार कर रही थी, वह उसके लिए असंभव से ज़्यादा अबूझ था। उसे काम सौंपने वालों के इरादों में कभी दिलचस्पी नहीं रही थी, और न वह उन लोगों के बारे में सोचती थी जो उन कामों का विषय होते थे।

उसे शहर के सबसे मशहूर व्यक्ति की गुमशुदगी का पता लगाना था। वह व्यक्ति था सर्वशक्तिमान।

सर्वशक्तिमान एक सुपरहीरो था, जिसके पास अलौकिक शक्तियाँ थीं। वह ताक़तवर था, उड़ सकता था, और न धारदार हथियार उसे चोट पहुँचा सकते थे, न गोलियाँ। शारीरिक क्षमताओं में कोई मनुष्य उसके आसपास भी नहीं था।

लगभग बीस साल पहले वह अचानक प्रकट हुआ था — मानो कहीं से भी नहीं। किसी दूसरे ग्रह से? किन्हीं प्रयोगों का परिणाम? किसी दूसरी वास्तविकता का जीव? इन सवालों के जवाब अज्ञात थे। उसके बदन पर सिर्फ़ एक धूसर सूट था और आँखों पर गोल काला चश्मा, जो वेल्डर के मुखौटे जैसा लगता था।

उसकी पहली बड़ी मदद शहर की सबसे ऊँची इमारत, होराइज़न, का शिखर लगाते समय लोगों को बचाना थी। सर्वशक्तिमान मदद के लिए आया और उसने क्रेन को गिरने से रोक लिया; निर्माणकर्मी बाहर निकल सके।

साल-दर-साल उसकी सफलताओं की सूची बढ़ती गई। कभी वह स्कूल की बस को नदी में गिरने से बचाता, तो अगले दिन बैंक की लूट रोक देता या मलबे से लोगों को निकाल लाता। आपदाओं, अपराधों और तमाम तरह की मुसीबतों से लोगों को बचाते हुए वह शहर का अनौपचारिक रक्षक बन गया।

«सर्वशक्तिमान» जल्द ही महज़ उपनाम नहीं रहा; वह ऐसा नाम बन गया जिसे लोग एक विशेष श्रद्धामिश्रित भय के साथ लेते थे। समय के साथ समाज की नज़र में वह सिर्फ़ नायक नहीं रहा, लगभग धार्मिक आराधना का विषय बन गया। मिथक वास्तविकता बन गया था और धीरे-धीरे उसकी पूजा होने लगी थी। शहर के लोगों के लिए सर्वशक्तिमान इस विचार का मूर्त रूप था कि उनसे भी बड़ी, उनसे भी अधिक शक्तिशाली कोई चीज़ मौजूद है — कोई ऐसा, जो संकट की किसी भी घड़ी में मदद के लिए आ सकता है।

फिर भी सर्वशक्तिमान हमेशा एक रहस्य बना रहा। उसने अपना उद्गम नहीं बताया, कभी साक्षात्कार नहीं दिया, यहाँ तक कि सार्वजनिक आयोजनों में भी शामिल नहीं हुआ। वह किसी छाया की तरह था: सबसे ज़्यादा ज़रूरत पड़ने पर प्रकट होता और अपना काम पूरा करते ही ग़ायब हो जाता।

कुछ हफ़्ते पहले सर्वशक्तिमान ग़ायब हो गया था।


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